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Maharashtra Board Class 10 Hindi Lokvani Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध

Balbharti Maharashtra State Board Class 10 Hindi Solutions Lokvani Chapter 1 सोंधी सुगंध Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Maharashtra State Board Class 10 Hindi Lokvani Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध

Hindi Lokvani 10th Std Digest Chapter 1 सोंधी सुगंध Textbook Questions and Answers

सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए

(१) कृति पूर्ण कीजिए:

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध 1
Answer:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध 4

Maharashtra Board Class 10 Hindi Lokvani Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध

(२) कृति पूर्ण कीजिए:

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध 2
Answer:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध 6

(३) गीत में प्रयुक्त क्रियारूप लिखिए:

बाग-बगीचे, ताल-तलैया …………
Answer:
मुसकाएँ

झूम-झूमकर मस्ती में तरु गीत ………..
Answer:
सुनाएँ

मधुमास आस-विश्वास ………..
Answer:
किया

धरती ने ………….
Answer:
बढ़ाता

(४) उपसर्ग-प्रत्यय लगाकर शब्द लिखिए :

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध 3
Answer:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध 5

अभिव्यक्ति

प्रस्तुत गीत की प्रथम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।
Answer:
वर्षा ऋतु के आगमन पर धरती पर बारिश की बूंदों का गिरना शुरू हो जाता है। बारिश की बूंदें धरती पर गिरकर मिट्टी को स्पर्श करती हैं, जिस कारण मिट्टी से सोंधी सुगंध आने लगती है। यह सोंधी सुगंध मिट्टी से बातें करने लगती हैं।

बारिश की बूंदों की अनुभूति से धरती प्रफुल्लित हो गई है। इसलिए जैसे ही बारिश थम जाती है; वैसे ही वह अपनी आँखें खोलती हैं। मोर को भी वर्षाऋत अत्यंत प्रिय है। अत: वह भी वर्षाऋत में खश होकर कह रहा है कि चारों ओर हरियाली ही हरियाली छा गई है। भीषण गरमी के कारण धरती बंजर हो गई थी। बादल बरसने के बाद हरियाली-सा हरा वस्त्र धारण करने का धरती का जो सपना था; वह अब वह पूरा हो गया है।

भाषा बिंदु

वर्तनी के अनुसार शुद्ध शब्द छाँटकर लिखिए:

  1. विश्वास/विशवास/विसवास ……..
  2. मसतक/मस्थक/मस्तक ……….
  3. पथ्थर/पथ्तर/पत्थर …………
  4. कुरीति/कूरिति/कुरिती …………
  5. चिन्ह/चीहन/चिह्न …………..
  6. इकठठा/इकट्टा/इकट्ठा ………….
  7. खुबसुरत/खूबसुरत/खूबसूरत …………
  8. विदयापीठ/विद्यापीठ/विद्यापिठ ………….
  9. बुद्धी/बुध्दी/बुद्धि ………….
  10. परिक्षार्थि/परीक्षार्थि/परीक्षार्थी ………….

Answer:

  1. विश्वास
  2. मस्तक
  3. पत्थर
  4. कुरीति
  5. चिह्न
  6. इकट्ठा
  7. खूबसूरत
  8. विद्यापीठ
  9. बुद्धि
  10. परीक्षार्थी

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उपयोजित लेखन

निम्नलिखित सुवचन पर आधारित कहानी लिखिए:

‘स्वास्थ्य ही संपदा है।’
Answer:
श्रीरामपुर गाँव में धनसुखलाल नाम का एक धनी व्यक्ति रहता था। वह बहुत ही कंजूस प्रवृत्ति का था। रईस होने के बावजूद भी वह स्वयं पर कभी भी पैसे खर्च नहीं करता था। वह दिन में सिर्फ एक वक्त का भोजन करता था। इतना ही नहीं वह अपने परिवार वालों पर भी धन खर्च नहीं करता था। उसकी कंजूसी के कारण उसका परिवार प्रतिदिन भूखे पेट ही सोता था। एक दिन धनसुखलाल बीमार पड़ गया।

भरपेट खाना न खाने के कारण उसका शरीर कमजोर हो गया था। उसकी शक्ति कम हो गई थी। परिवार के लोग उसे डॉक्टर के पास ले जाना चाहते थे। लेकिन डॉक्टर के पास जाकर काफी रूपया खर्च हो जाएगा। इसलिए उसने घरेलू औषधियों लेना प्रारंभ कर दिया। आहिस्ता-आहिस्ता उसका शरीर अत्यधिक अस्वस्थ और कमजोर हो गया।

यहाँ तक कि अब उठकर चलने की शक्ति भी उसमें शेष नहीं थी। फिर भी वह डॉक्टर के पास जाने के लिए राजी नहीं हुआ। उसी शाम गाँव में एक महात्मा आए। उन्होंने धनसुखलाल के बारे में सुना और वे स्वयं उसे मिलने गए। महात्मा को देखकर धनसुखलाल ने सोचा कि यह महात्मा उसका इलाज कर देंगे। उसने आशा से महात्मा को प्रणाम किया। महात्मा ने उसे स्पष्ट कहा – ‘मूर्ख धनसुखलाल, मैं तुम्हारा भविष्य जानता हूँ। यदि तुम अभी डॉक्टर के पास नहीं जाओगे; तो कल सुबह तक तुम्हारी मृत्यु निश्चित है।’

महात्मा की भविष्यवाणी सुनकर धनसुखलाल के हाथ-पाँव काँपने लगे और महात्मा को प्रणाम करके वह तुरंत अपने परिवार वालों के साथ डॉक्टर के पास चला गया। डॉक्टर ने पूरी निष्ठा से उसका इलाज किया। कुछ दिनों के बाद वह ठीक हो गया। अब उसकी समझ में आ गया था कि ‘स्वास्थ्य ही संपदा होती है।’ सीख : स्वास्थ्य से बढ़कर दूसरी कोई संपत्ति नहीं होती। व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य का सदैव ध्यान रखना चाहिए।

Hindi Lokvani 10th Std Textbook Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध Additional Important Questions and Answers

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।
कृति अ (१): आकलन कृति

कृति पूर्ण कीजिए।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध 14
Answer:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध 7

समझकर लिखिए।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध 13
Answer:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध 8

Maharashtra Board Class 10 Hindi Lokvani Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध

‘सदियों का जो सपना है हो जाए पूरा।’ इससे आप समझते हैं
Answer:
भीषण गरमी के कारण धरती बंजर हो गई थी। अब बारिश के आने से वह फिर से हरी-भरी हो जाएगी।

कृति अ (२) : शब्द संपदा

निम्नलिखित शब्दों के अर्थ पद्यांश में से ढूँढ़कर लिखिए।

  1. मेघ
  2. मोर
  3. मृदा
  4. ख्वाब

Answer:

  1. बादल
  2. मयूरा
  3. माटी
  4. सपना

विलोम शब्द लिखिए।

  1. सुगंध x ……..
  2. पूरा x ………

Answer:

  1. सुगंध x दुर्गंध
  2. पूरा x अधूरा

वचन बदलिए।

  1. सदी
  2. हरियाली
  3. टोली
  4. आँखें

Answer:

  1. सदियाँ
  2. हरियालियाँ
  3. टोलियाँ
  4. आँख

निम्नलिखित तत्सम शब्द का तद्भव रूप लिखिए।

  1. मयूर
  2. हरित

Answer:

  1. मोर
  2. हरा या हरी

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निम्नलिखित शब्द का देशज व तत्सम शब्द लिखिए।

Question 1.
मिट्टी
Answer:
देशज शब्द : माटी, तत्सम शब्द: मृदा

कृति अ (३) : स्वमत अभिव्यक्ति

आपने पहली बारिश के बाद चारों और महकने वाली मिट्टी की सुगंध को जरूर महसूस किया होगा। उस वक्त जो अनुभूति हुई थी, उसे अपने शब्दों में लिखिए।
Answer:
बारिश के पहले भीषण गरमी के कारण मिट्टी तपती है। जैसे ही वर्षा की पहली बूंदें धरती पर आती हैं, वैसे ही तपती हुई मिट्टी शीतलता का अनुभव करने लगती है। फिर उसमें से जो गंध उठती है, उसका क्या कहना? मिट्टी की सोंधी सुगंध सभी को आकर्षित करती है। मैं पिछले वर्ष बरसात शुरू होने से पहले अपने गाँव गया था। वहाँ पर मैंने पहली बरसात का अनुभव किया था। बारिश रुकते ही अचानक से सारा वातावरण मिट्टी की भीनी-भीनी सोंधी खुशबू से प्रफुल्लित हो उठा। मानो वह सोंधी महक मुझे बता रही थी कि हम सब उससे जुड़े हैं। हमारा शरीर भी उसी से बना है। आखिर मिट्टी हमें जीवन देती है। सचमुच मिट्टी की उस सोंधी महक ने मेरे चित्त को प्रसन्न कर दिया था। आज भी वह महक मेरे रोम-रोम में समाई हुई है। उस सोंधी महक को महसूस हुए मुझे मनुष्य और मिट्टी के बीच जो गहरा रिश्ता है इसका एहसास भी हुआ था।

संजाल पूर्ण कीजिए।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध 12
Answer:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध 9

कृति आ (२) : शब्द संपदा

‘रोली’ शब्द का अनेकार्थी शब्द लिखिए।
Answer:
सिंदूर, प्रसिद्ध भूमि, हल्दी व चूने का चूर्ण

निम्नलिखित तद्भव शब्द का तत्सम रूप लिखिए।

  1. माथा
  2. पेड़

Answer:

  1. मस्तक
  2. तरु

वचन बदलिए।

  1. बोली
  2. रोली
  3. झोली
  4. बगीचा

Answer:

  1. बोलियाँ
  2. रोलियाँ
  3. झोलियाँ
  4. बगीचे

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कृति आ (३) : स्वमत अभिव्यक्ति

‘बारिश के बाद प्रकृति में होने वाला परिवर्तन’ विषय पर अपने विचार लिखिए।
Answer:
वर्षा ऋतु समस्त ऋतुओं की रानी है। बारिश होते ही चारों ओर हरियाली छा जाती है। वर्षा होने से तालाबों और नहरों में पानी भर जाता है। सागर अपनी मस्ती में लहरों के साथ नर्तन करता रहता है। वर्षा से सूखे पेड़-पौधों में भी जीवन आ जाता है। संपूर्ण वातावरण खुशनुमा हो जाता है। मिट्टी से सोंधी महक आनी शुरू हो जाती है। यह महक हमारे चित्त को प्रसन्न कर देती है। बारिश के बाद कृषकों में उल्लास बढ़ जाता है और वे अपने खेतों में लगन के साथ जुट जाते हैं। मोर प्रसन्न होकर नाचने लगते हैं और मेंढक टर्र-टर्र की आवाज करते रहते हैं। इस प्रकार बारिश के बाद प्रकृति की शोभा देखने लायक होती है।

समझकर लिखिए।

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Answer:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध 11

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

कृति इ (१): आकलन कृति

Question 1.
सदा-सदा से यह चली आई है –
Answer:
हँसी-ठिठोली

Question 2.
यह नतमस्तक हो गए हैं –
Answer:
कवि ‘अचूक’

निम्नलिखित शब्द पढ़कर ऐसे दो प्रश्न तैयार कीजिए कि जिनके उत्तर निम्न शब्द हों

Question 1.
माटी
Answer:
सोंधी-सौंधी-सी सुगंध किससे बात कर रही है?

Question 2.
मधुमास
Answer:
कवि ने पावस को किसकी उपमा दी है। (३) कृति पूर्ण कीजिए।

कृति इ (२) : शब्द संपदा

पद्यांश में से शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए।
Answer:
आस-विश्वास,
सदा-सदा,
हँसी-ठिठोली,
सोंधी-सौंधी-सी

निम्नलिखित तत्सम शब्द का तद्भव रूप लिखिए।

  1. पद
  2. मास

Answer:

  1. पाँव या पैर
  2. महीना

निम्नलिखित तद्भव शब्द का तत्सम रूप लिखिए।

  1. हँसी

Answer:

  1. हास्य

Maharashtra Board Class 10 Hindi Lokvani Solutions Chapter 1 सोंधी सुगंध

निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखिए।

  1. मधुमास
  2. पुष्प
  3. आस
  4. नत

Answer:

  1. वसंत ऋतु
  2. फूल
  3. आशा
  4. विनीत

कृति इ (३) : स्वमत अभिव्यक्ति

‘मनुष्य जीवन में वर्षा का महत्त्व’ इस विषय पर अपने विचार लिखिए।
Answer:
हमारा भारत देश कृषिप्रधान देश है। यदि बारिश समय पर न होगी, तो सूखा या दुर्भिक्ष (अकाल) की स्थिति निर्माण होने में देर नहीं लगेगी। वर्ष के बारह महीने में से तीन या चार महीनों तक लगातार बारिश होने के कारण प्रकृति का संतुलन बना रहता है। जल के बिना मनुष्य जीवन संभव नहीं। इसलिए हमारे जीवन में वर्षा का अत्यधिक महत्त्व है। वर्षा का मौसम तपती गरमी से राहत दिलाता है। बारिश की बूंदें धरती के बढ़े हुए तापमान को अपने अंदर समा लेती हैं। वर्षाकाल में लोग वर्षा का आनंद लेने के लिए पिकनिक मनाते हैं। वर्षा में सूखे हए तालाब, कुएँ और नदियाँ फिर से भर जाती हैं। इस कारण पूरे वर्ष तक मनुष्य को पीने के लिए पानी उपलब्ध होता है।

सोंधी सुगंध Summary in Hindi

सोंधी सुगंध कवि-परिचय

जीवन-परिचय : डॉ. कृपाशंकर शर्मा जी का जन्म उत्तर प्रदेश के एटा शहर में हुआ। हिंदी साहित्य में इन्हें ‘अचूक’ इस उपनाम से जाना
जाता है। इन्हें बालगीतकार एवं बालकहानीकार के रूप में अधिक जाना जाता है। इन्होंने कविता के विविध अंगों को सूक्ष्मता से जाना-पहचाना है। गीत, गजल, कविता एवं दोहे इनकी रचना का प्रमुख विषय रहे हैं। समीक्षा के क्षेत्र में भी इनका कार्य उल्लेखनीय हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में भी इनकी सक्रियता रही है।

प्रमुख कृतियाँ : ‘फिर भी कहना शेष रह गया’, ‘नदी उफान भरे’ (गीत संग्रह), ‘गीत खुशी के गाओ तुम’ (बालगीत संग्रह) आदि।

सोंधी सुगंध पद्य-परिचय

गीत : गीत हिंदी साहित्य की एक लोकप्रिय विधा है। स्वर, पद और ताल से युक्त जो गान होता है, वह ‘गीत’ कहलाता है। इसमें एक मुखड़ा तथा कुछ अंतरे होते हैं। प्रत्येक अंतरे के बाद मुखड़े को दोहराया जाता है। इसमें गेयता विद्यमान होती है।

प्रस्तावना : ‘सोंधी सुगंध’ इस गीत में कवि डॉ. कृपाशंकर शर्मा ‘अचूक’ जी ने वर्षा ऋतु का आगमन होने पर प्रकृति में छाई प्रसन्नता एवं खुशहाली का बड़ा ही सजीव एवं मनोहारी वर्णन किया है। वर्षा ऋतु में प्रकृति के विविध रूपों में होनेवाले परिवर्तन का अत्यंत आहलाददायी वर्णन प्रस्तुत कविता में किया गया है।

सोंधी सुगंध सारांश

प्रस्तुत कविता के माध्यम से स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक ऋतु का अपना महत्त्व और अपनी विशेषता है। भीषण गर्मी के कारण तापमान बढ़ता है। सभी भीषण गर्मी से व्याकुल हो जाते हैं। वर्षा तपती गर्मी से राहत दिलाती है। छम-छम करता हुआ पानी देख सबके चेहरे पर रौनक आ जाती है। पहली बारिश की बूंदें धरती को स्पर्श करती हैं, जिस कारण मिट्टी से सोंधी सुगंध आने लगती है। यह सोंधी सुगंध मिट्टी से बातें करने लगती हैं। वह वर्षा के कारण प्रकृति के विविध रूपों, वन्य-जीव, पेड़-पौधों, नदी-तालाबों आदि में होने वाले परिवर्तनों से सभी को रूबरू कराती हैं। वर्षा ऋतु एक प्रेरणादायी ऋतु है। वह प्रत्येक मानव के मन में आस एवं विश्वास भर देती है। इसलिए सदियों से वर्षा का स्वागत होता आ रहा है। सदियों से वर्षा के आगमन पर लोग खुश होते हैं और होते रहेंगे।

सोंधी सुगंध शब्दार्थ

  • सोंधी – सुगंधित
  • रोली – हल्दी-चूने का चूर्ण
  • मंसूबा – विचार, इरादा
  • मधुमास – वसंत ऋतु
  • माटी – मिट्टी
  • धरती – पृथ्वी
  • मयूरा – मोर
  • टोली – दल
  • ताल-तलैया – तालाब-झरने
  • पवन – हवा
  • तरू – पेड़
  • ‘अचूक’ – कवि का उपनाम

सोंधी सुगंध भावार्थ

सोंधी-सौंधी-सी …………………………. माटी से बोली।

वर्षा ऋतु के आगमन पर धरती पर बारिश की बूंदों का गिरना शुरू हो जाता है। बारिश की बूंदें धरती पर गिरकर मिट्टी को स्पर्श करती। हैं, जिस कारण मिट्टी से सोंधी सुगंध आने लगती है। यह सोंधी सुगंध मिट्टी से बातें करने लगती है। बारिश की बूंदों की अनुभूति से धरती प्रफुल्लित हो गई है। इसलिए जैसे ही बारिश थम जाती है; वैसे ही वह अपनी आँखें खोलती हैं। मोर को भी वर्षाऋतु अत्यंत प्रिय है।

अत: वह भी वर्षाऋतु में खुश होकर कह रहा है कि चारों ओर हरियाली ही हरियाली छा गई है। भीषण गरमी के कारण धरती बंजर हो गई थी। बादल बरसने के बाद हरियाली-सा हरा वस्त्र धारण करने का धरती का जो सपना था; वह अब पूरा हो गया है। भला वर्षा के आगमन से कौन खुश नहीं होता?

प्रकृति के सभी अपादान अपनी-अपनी टोली में एकत्रित होकर आनंद व्यक्त कर रहे हैं। वर्षाऋतु के इस सुहावने व मनभावन मौसम में कोई भी अकेला रहना नहीं चाहता। सोंधी सुगंध मिट्टी से कह रही है कि इसमें जो इत्र है, उसमें बारिश का जिक्र है अर्थात वर्षा में सर्वत्र मोहक खुशबू छा गई है।

बाग बगीचे …………………………. माटी से बोली।

वर्षा के आगमन से प्रकृति का प्रत्येक अंग हर्षित एवं प्रफुल्लित हो उठा है। बाग-बगीचे, ताल-तलैया आदि सब मुस्करा रहे हैं। पेड़ भी बरसात के मौसम में अपनी मस्ती में झूम रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि वे खुशी के गीत गा रहे हैं। वर्षा का साथ पाकर पवन भी आनंदविभोर हो गया है। उसने अपनी ठंड हवा की झोली प्रसन्न होकर खोल दी है। जिससे वातावरण और अधिक खुशनुमा हो गया है। सोंधी सुगंध मिट्टी से कह रही है कि इसमें जो इत्र है, उसमें बारिश का जिक्र है अर्थात वर्षा में सर्वत्र मोहक खुशबू छा गई है।

सागर का जो …………………………. माटी से बोली।

वर्षा के आगमन से सागर की अपनी खुशी का इरादा भी सफल हो गया है। वह खुशी के उफान से भर गया है। सागर वर्षाऋतु में अपनी ही खुशियों की दुनिया में खो गया है। अत: वह अपनी लहरों के साथ नृत्य कर रहा है। वर्षा के आगमन के कारण धरती ने अपने तन पर हरियालीयुक्त हरित वस्त्र का परिधान धारण किया। धरती ने अपने मस्तक पर रोली लगाई है। वर्षा-उत्सव के लिए उसने श्रृंगार किया है।

सोंधी सुगंध मिट्टी से कह रही है कि इसमें जो इत्र है, उसमें बारिश का जिक्र है अर्थात वर्षा में सर्वत्र मोहक खुशबू छा गई है।

पावस का मधुमास …………………………. माटी से बोली।

पावस का मधुमास यानी वर्षाऋतु में वसंत जिस प्रकार वसंत ऋतु में वृक्षों पर नए पत्ते एवं फूल आते हैं। वैसे ही वर्षा ऋतु में प्रकृति सजती-संवरती है। सर्वत्र आनंद व्याप्त होता है। वर्षा ऋतु प्रत्येक मानव के मन में आस एवं विश्वास भर देती है। कवि भी वर्षा के इस आनंद से अछूते नहीं है। वह भी वर्षा ऋतु के सामने नतमस्तक होकर उसके स्वागत में पुष्प अर्पण करते हैं।

यह तो प्रतिवर्ष आने वाला उत्सव है। सदियों से वर्षा का स्वागत होता आ रहा है। सदियों से वर्षा के आगमन पर लोग खुश होते हैं और होते रहेंगे। यह हँसी-ठिठोली सदा से चलती आ रही है। सोंधी सुगंध मिट्टी से कह रही है कि इसमें जो इत्र है, उसमें बारिश का जिक्र है अर्थात वर्षा में सर्वत्र मोहक खुशबू छा गई है।

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काव्यपरिचय

‘तू बुद्धी दे’ ही प्रार्थना कवी ‘गुरू ठाकूर’ यांनी लिहिली आहे. या प्रार्थनेत सन्मार्ग, सन्मती आणि सत्संगती यांचे महत्त्व कवीने दाखवून दिले आहे. कायम सत्याची कास धरून संवेदनशीलता जपण्यासाठी ताकद मिळावी, अनाथांचे नाथ होण्यास बळ मिळावे व या शाश्वत सौंदर्याचा ध्यास लागावा, ही भावना कवीने या प्रार्थनेतून व्यक्त केली आहे.

Tu Buddhi de’ is a prayer composed by Guru Thakur. It highlights the importance of the right path, good thoughts, and good company. The poet has prayed for truth and sensitivity. He suggests that one should have courage to be the saviour of orphans.

भावार्थ

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 1 तू बुद्धी दे 1

तू बुद्धि दे तू तेज दे नवचेतना विश्वास दे
जे सत्य सुंदर सर्वथा आजन्म त्याचा ध्यास दे

नित्य पठणीय अशी ही प्रार्थना आहे. कवी सांगतात की, हे ईश्वरा, तू आम्हाला बुद्धी दे. तू नवविचारांचे तेज दे. आपल्यामध्ये नवचेतना जागवण्यास विश्वास दे. या धरतीवर जे सत्य, सुंदर आहे. जे अजरामर आहे, जे सर्व ठिकाणी भरून राहिलेले आहे त्या सर्वांचा ध्यास माझ्या मनात जीवनभर राहू दे. म्हणजेच जे सदैव सत्य, सुंदर आहे त्याचे माझ्याकडून व्यवस्थित पालन व्हावे. तसेच त्याचप्रकारच्या नवनिर्मितीचा ध्यास म्हणजे उत्कट इच्छा आजन्म माझ्या मनात राहू दे.

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 1 तू बुद्धी दे

हरवले आभाळ ज्यांचे हो तयांचा सोबती,
सापडेना वाट ज्यांना हो तयांचा सारथी
साधना करिती तुझी जे नित्य तव सहवास दे

ज्यांचा कोणी पालनकर्ता नाही, ज्यांचा सांभाळ करणारे असे कोणी नाही, ज्यांना माया देणारे आभाळ नाही त्यांचा तू सोबती-सखा बन. त्यांना आश्रय देण्याचे काम तू कर. त्यांना मायेची सावली देण्याचे काम कर. जे जीवनाच्या वाटेवर प्रवास करताना भरकटलेले आहेत, ज्यांना जीवनाच्या सार्थकतेची वाट सापडत नाही त्यांचा तू सारथी बनून मार्ग दाखवण्याचे काम कर. तुझी जे साधना करतात, नित्य तुझी जे प्रार्थना करतात. त्यांना तू सतत तुझा सहवास दे. म्हणजेच तू नेहमीच त्यांच्या सोबत राहा.

जाणावया दुर्बलांचे दु:ख आणि वेदना
तेवत्या राहो सदा रंध्रातुनी संवेदना
धमन्यातल्या रुधिरास या खल भेदण्याची आस दे
सामर्थ्य या शब्दांस आणि अर्थ या जगण्यास दे

या जगात जे दुर्बल आहेत, त्यांचे दुःख आणि वेदना जाणून घेण्यासाठी माझ्या शरीरातील रंधा-रंध्रात सतत संवेदना तेवत ठेवण्याचे काम तू कर. माझ्या मधील संवेदना सतत जागृत ठेवण्याचे काम तू कर. दुःखितांचे दुःख दूर करण्याची आस माझ्या शरीरातील प्रत्येक धमन्यातून वाहणाऱ्या रक्तात असू दे. ही शब्दरूपी काव्य सुमने मी तुझ्यापुढे ठेवतो. त्या सर्व शब्दास आणि माझ्या संपूर्ण जगण्यास एक प्रकारचा अर्थ तू दे. जेणेकरून माझा जन्म दुर्बलांचे दु:ख दूर करण्यासाठी उपयोगी पडेल.

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 1 तू बुद्धी दे

सन्मार्ग आणि सन्मती लाभो सदा सत्संगती
नीती ना ही भ्रष्ट हो जरी संकटे आली किती
पंखास या बळ दे नवे झेपावण्या आकाश दे

मला सतत चांगला मार्ग आणि चांगली बुद्धी लाभू दे. सतत चांगल्या, सज्जन माणसांची संगत मिळू दे. माझ्या जीवनात कितीही संकटे आली तरी मी माझ्या कर्तव्यापासून कधी दूर होणार नाही, अशी माझी नितीमत्ता राहू दे. माझे आचरण कधीही भ्रष्ट होऊ नये. जीवनरूपी वाटेवरून प्रवास पार करण्यासाठी या पंखांना तू बळ दे. कायम सत्याची कास धरून संवेदनशीलता जपण्यासाठी तसेच आकाशात झेपावण्यासाठी बळ दे. म्हणजेच सतत सौंदर्याचा ध्यास माझ्या मनात राहू दे आणि तो ध्यास पूर्ण करण्यासाठी नवे आकाश म्हणजेच आकाशाएवढ्या नव्या संध्या तू निर्माण कर, की ज्यामध्ये मी माझे कर्तृत्व दाखवू शकेन.

शब्दार्थ

तेज – उत्साह – (energy, vigour)
नव – नवीन – (new) Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 1 तू बुद्धी दे
चेतना – उत्तेजन, प्रोत्साहन – (inspiration)
सर्वथा – सदैव, सर्व अर्थांनी –
आजन्म – आयुष्यभर, जन्मभर – (lifetime)
ध्यास – उत्कट इच्छा – (agreat longing)
तयांचा – त्यांचा – (to him)
सोबती – सखा, मित्र – (friend)
सापडेना – मिळेना – (not Found)
वाट – रस्ता, मार्ग – (way)
साधना – तपश्चर्या – (learring the hard way)
करिती – करतात – (todo)
नित्य – रोज – (daily)
तव – त्यांना – (to him) Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 1 तू बुद्धी दे
जाणवाया – जाणून घेण्यासाठी – (to understand)
दुर्बल – ज्यांच्यात बल (शक्ती) नाही – (weak, feeble)
तेवत्या – तेवत (जळणे) – (to be lit)
सदा – सतत – (always)
संवेदना – सह वेदना – (sensation)
खल – दुष्ट – (wicked)
भेदणे – दूर करणे
आस – इच्छा, आवड – (a great longing)
सामर्थ्य – शक्ती – (power, strength)
सन्मार्ग – चांगला मार्ग – (true way)
सन्मती – चांगली बुद्धी – (good thoughts)
लाभो – मिळणे – (to get)
सत्संगती – चांगली संगत (सोबत) – (good company)
भ्रष्ट – वाईट – (polluted)
बळ – शक्ती – (power) Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 1 तू बुद्धी दे
झेपावण्या – उडण्यासाठी – (to spring or leap)
सारथी – मार्गस रस्ता, दिशा दाखवणारा
रंध – त्वचेवरील अतिसूक्ष्म छिद्र – (pores)
धमन्या – संपूर्ण शरीरभर रक्त वाहून नेणाऱ्या नसा/नाडी – (veins)
रुधिर – रक्त – (blood)
नीती – सदाचाराचे नियम

Marathi Aksharbharati Std 10 Digest Pdf भाग-१

Maharashtra State Board 9th Std Marathi Kumarbharati Solutions

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9th Std Marathi Kumarbharati Digest Pdf भाग-१

Maharashtra Board Solutions Class 9

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9th Marathi Digest PDF

Maharashtra State Board 9th Std Marathi Aksharbharti Solutions

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Marathi Digest for 9th Std

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 1 सर्वात्मका शिवसुंदरा

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Maharashtra State Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 1 सर्वात्मका शिवसुंदरा

Marathi Aksharbharati Std 9 Digest Chapter 1 सर्वात्मका शिवसुंदरा Textbook Questions and Answers

सर्वात्मका शिवसुंदरा Summary in Marathi

कवीचा परिचय :

नाव : विष्णु वामन शिरवाडकर
कालावधी : 1912 – 1999

ज्ञानपीठ पारितोषिक विजेते, प्रसिद्ध लेखक, कवी, नाटककार. ‘जीवनलहरी’, विशाखा’, ‘समिधा’, ‘स्वगत’, ‘हिमरेषा’, ‘वादळवेल’, ‘मारवा’, ‘किनारा’ इत्यादी काव्यसंग्रह; ‘वैजयंती’, ‘राजमुकुट’, ‘कौतेय’, ‘नटसम्राट’, ‘वीज महणाली धरतीला’, ‘विदूषक’ इत्यादी नाटके प्रसिद्ध.

प्रस्तावना :

‘सर्वात्मका शिवसुंदरा’ ही प्रार्थना कवी कुसुमाग्रज यांनी लिहिली आहे. या प्रार्थनेत परमेश्वरास वंदन करून अंधारातून उजेडाकडे नेण्याची, संकटातही सामना करण्याची शक्ती देण्याची विनंती कवीने केली आहे.

A famous poet Kusumagraj has written the prayer Sarvatmaka Shivsundara’. In this prayer, the poet is seeking guidance from the almighty God. He is asking the Lord to bestow upon him the strength to survive in all tough, difficult situations. He is asking the God to transport him from the darkness of everyday life to enlightenment

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 1 सर्वात्मका शिवसुंदरा

भावार्थ :

सर्वात्मका शिवसुंदरा …………………….. आमुच्या ने जीवना।।
हे सर्व प्राणीमात्रांच्या ठिकाणी असलेल्या शिवसुंदरा परमेश्वरा, तू आमचे वंदन स्वीकार कर. हे परमेश्वरा, तू आमच्या जीवनाला अंधाराकडून प्रकाशाकडे घेऊन जा. आमच्या जीवनाला योग्य मार्ग दाखव.

सुमनांत तू गगनात …………………….. चोहीकडे रूपे तुझी जाणीव ही माझ्या मना ।।
हे परमेश्वरा, सुमनात म्हणजेच प्रत्येक फुलात, गगनात तूच सामावलेला आहे. तान्यांमध्ये देखील तू फुललेला म्हणजेच भरलेला, व्यापलेला आहेस. या जगामध्ये जे जे सद्धमनि वागतात त्या सर्वांमध्ये तू राहतोस. या सृष्टीमध्ये चोहीकडे तुझीच रूपे आहेत, याची मला जाणीव आहे.

श्रमतोस तू शेतामधे ……………………. तिथे तुझे पद पावना ।।
हे परमेश्वरा, शेतामध्ये त्या कष्ट करणाऱ्या लोकांबरोबर तू स्वत: मेहनत करतोस. या जगामध्ये जे जे दुःखी, कष्टी जीवनाने त्रासलेले आहेत, त्या लोकांची आसवे तू पुसतोस. म्हणजेच या सर्वांचे दुःख, त्रास तू दूर करतोस. जिथे कोणत्याही स्वार्थाशिवाय तुझी सेवा केली जाते, तिथे तुझे पावन चरण पाहायला मिळतात. तिथे तुझे अस्तित्व जाणवते.

न्यायार्थ जे लढती रणी………………….मुनी होतोस त्यांची साधना।।
पुढे कवी सांगतात की, जे लोक अन्यायाविरुद्ध लढतात, न्यायासाठी तलवार हातात घेऊन रणांगणावर लवण्यासाठी जातात, त्यांच्या हातातल्या तलवारीमध्ये परमेश्वरा तू राहतोस. तसेच जे लोक ध्येयवेडे असतात. जे आपले ध्येय प्राप्त करण्यासाठी अंधारातून (संकटातून) ही मार्ग काढतात तू त्यांच्यामध्ये दीप बनून राहतोस. त्यांच्यात आत्मविश्वास, हिंमत निर्माण करतोस. म्हणजेच ध्येय प्राप्तीचा योग्य मार्ग तू त्यांना दाखवतोस. तसेच जे ज्ञानाची लालसा मनामध्ये धरून त्याची कास धरतात, त्यासाठी तप करतात, त्यांची ज्ञानसाधना तू होतोस.

करुणाकरा करुणा तुझी ………………. नित जगवि भीतीवाना।।
कवी परमेश्वराला सांगतो, हे करुणाकरा तुझा आशीर्वाद पाठीशी असताना मला कुठलीही भीती नाही. त्यामुळे आयुष्याच्या वाटेवर चालताना माझ्या प्रत्येक पावलाबरोबर तुझे पाऊल असेल, याची मला पक्की खात्री आहे. त्यामुळे माझ्याकडून नेहमीच सूजनत्व मणजेच नवनिर्मिती होईल. माझ्या मनात त्याविषयी कोणतीच भीती असणार नाही.

Maharashtra Board Class 9 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 1 सर्वात्मका शिवसुंदरा

शब्दार्थ :

  1. ज्ञानपीठ पुरस्कार – साहित्य क्षेत्रातील सर्वोत्कृष्ट पुरस्कार
  2. सर्वात्मका – सर्व प्राणिमात्रांच्या ठिकाणी असलेला जीवात्मा, परमेश्वर (the soul of all, the entire self)
  3. शिव – शंकर (God Shiva)
  4. सुंदरा – सुंदर (beautiful)
  5. स्वीकार – अंगीकार (acceptance)
  6. अभिवादन – वंदन, नमन (salutation)
  7. तिमिर – अंधार, काळोख (darkness)
  8. तेज – प्रकाश, लकाकी (brightness)
  9. प्रभु – ईश्वर, देव (God, Lord)
  10. जीवन – आयुष्य (life)
  11. सुमन – फूल (a flower)
  12. गगन – आकाश, नभ (the sky)
  13. तारा – चांदणी (star)
  14. सद्धर्म – चांगला धर्म, सदाचार (good quality, good conduct)
  15. जग – दुनिया, विश्व (the world, the universe)
  16. वसणे – राहणे, वस्ती करणे (to establish, to stay)
  17. चोहिकडे – सभोवार, सर्वत्र (everywhere, all round)
  18. रूप – आकार (form, shape)
  19. जाणीव – बोध, आकलन (consciousness, realization)
  20. मन – चित्त, अंत:करण (the mind)
  21. राबसी – राबतोस, भरपूर कष्ट करतोस (to work hard)
  22. श्रमिक – कामकरी, कष्ट करणारा (a labour, a worker)
  23. रंजले – त्रासले (to be harassed)
  24. गांजणे – त्रासून जाणे, सतावले जाणे (to be harassed)
  25. आसवे – अश्रू (tears)
  26. स्वार्थ – स्वत:चा लाभ, मतलब (selfishness)
  27. पद – पाय, पाऊल (a foot, a foot step)
  28. न्याय – नीती (justice)
  29. रण – रणभूमी, युद्धाची जागा, रणांगण (battlefield)
  30. कर – हस्त, ह्यत (hand)
  31. ध्येय – उद्दिष्ट, साध्य (a goal, an aim)
  32. तमी – तम, अंधकार काळोख (darkness)
  33. अंतरी – आतमध्ये (in interior)
  34. ज्ञान – माहिती, प्रतिती (knowledge)
  35. तपती – तपतात (experience burning, blazing, heat)
  36. मुनि – ऋषी, साधू, तपस्वी (a holy sage)
  37. साधना – तपश्चर्या (penance)
  38. करुणा – दया (compassion, mercy)
  39. भय – भीती, धास्ती (fear, fright)
  40. मार्ग – रस्ता (way)
  41. सदा – नेहमी (always)
  42. तव – तुझे (yours)
  43. पावले – पाऊले, पाय (feet)
  44. सूजनत्व – नवनिर्मिती (creation)
  45. नित – नेहमी, सदा (always, daily, everyday)
  46. जगवि – जागव (to wake up)

Marathi Digest For 9th Std भाग-१

Balbharati Solutions for Std 12, 11, 10, 9, 8, 7, 6, 5th Class Digest Answers

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